गणतंत्र दिवस पर कविता | 26 January Par Kavita | Poem On Republic Day in Hindi

Poem On Republic Day in Hindi:  भारत के नागरिक हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस बड़े उत्साह और जुनून के साथ मनाते हैं। हमारा देश, भारत उस दिन का सम्मान करने के लिए हर साल गणतंत्र दिवस मनाता है स्वतंत्रता प्राप्ति के लगभग 3 वर्ष बाद 26 जनवरी, 1950 को भारत एक स्वशासित, समावेशी, समाजवादी और लोकतांत्रिक राष्ट्र बन गया। जब भारत का संविधान लागू हुआ था इसे भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय अवकाश के रूप में घोषित किया गया है। भारत में लोग अपने-अपने तरीके से जश्न मनाकर इस महान दिन का आनंद लेते हैं। इस दिन भारत की राष्ट्रीय राजधानी, नई दिल्ली में राजपथ (इंडिया गेट के सामने) पर भारत के राष्ट्रपति की उपस्थिति में परेड होती है। हर वर्ष विभिन्न देशों से अतिथि वक्ता आमंत्रित किये जाते हैं। ये सब गणतंत्र दिवस पर होने वाले जश्न का हिस्सा हैं।

गणतंत्र दिवस के दिन भारत के कॉलेज और स्कूलों में गणतंत्र दिवस संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं जहां पर छात्र सम्मिलित होकर गणतंत्र दिवस उमंग और उत्साह के साथ मनाते हैं 26 जनवरी के मौके पर हम आपके लिए गणतंत्र दिवस पर कविताएं हिंदी में ( Poem On Republic Day In Hindi ) लेकर आए हैं। लोग गूगल पर गणतंत्र दिवस पर कविताएं ( Republic Day Poem In Hindi ), स्कूल में बोलने के  गणतंत्र दिवस पर कविताएं सर्च करते हैं, आज हम अपने लेख में Republic Day Poems In Hindi का विवरण आपके साथ साझा करेंगे आर्टिकल पर बने रहिएगा चली जानते हैं:-

गणतंत्र दिवस पर कविताएं ( Poems On Republic Day )

गणतंत्र दिवस पर बेहतरीन कविताओं का कलेक्शन नीचे दे रहे हैं- 

पहली कविता

26 जनवरी है आयी, गणतंत्र की सौगात है लायी।

अधिकार दिये हैं इसने अनमोल, जीवन में बढ़ सके बिन अवरोध।

हर साल 26 जनवरी को होता है वार्षिक आयोजन,

लाला किले पर होता है जब प्रधानमंत्री का भाषन।

नयी उम्मीद और नये पैगाम से, करते है देश का अभिभादन,

अमर जवान ज्योति, इंडिया गेट पर अर्पित करते श्रद्धा सुमन,

2. मिनट के मौन धारण से होता शहीदों को शत-शत नमन।

सौगातो की सौगात है, गणतंत्र हमारा महान है,

आकार में विशाल है, हर सवाल का जवाब है,

संविधान इसका संचालक है, हम सब का वो पालक है,

लोकतंत्र जिसकी पहचान है, हम सबकी ये शान है,

गणतंत्र हमारा महान है, गणतंत्र हमारा महान

दूसरा कविता 

आओ तिरंगा लहराये, आओ तिरंगा फहराये;

अपना गणतंत्र दिवस है आया, झूमे, नाचे, खुशी मनाये।

अपना 75वाँ गणतंत्र दिवस खुशी से मनायेगे;

देश पर कुर्बान हुये शहीदों पर श्रद्धा सुमन चढ़ायेंगे।

26 जनवरी 1950 को अपना गणतंत्र लागू हुआ था,

भारत के पहले राष्ट्रपति, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने झंड़ा फहराया था,

मुख्य अतिथि के रुप में सुकारनो को बुलाया था,

थे जो इंडोनेशियन राष्ट्रपति, भारत के भी थे हितैषी,

था वो ऐतिहासिक पल हमारा, जिससे गौरवान्वित था भारत सारा।

विश्व के सबसे बड़े संविधान का खिताब हमने पाया है,

पूरे विश्व में लोकतंत्र का डंका हमने बजाया है।

इसमें बताये नियमों को अपने जीवन में अपनाये,

थाम एक दूसरे का हाथ आगे-आगे कदम बढ़ाये,

आओ तिरंगा लहराये, आओ तिरंगा फहराये,

अपना गणतंत्र दिवस है आया, झूमे, नाचे, खुशी मनाये।

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तीसरा कविता

हम गणतंत्र भारत के निवासी, करते अपनी मनमानी,

दुनिया की कोई फिक्र नहीं, संविधान है करता पहरेदारी।।

है इतिहास इसका बहुत पुराना, संघर्षों का था वो जमाना;

न थी कुछ करने की आजादी, चारों तरफ हो रही थी बस देश की बर्बादी,

एक तरफ विदेशी हमलों की मार,

दूसरी तरफ दे रहे थे कुछ अपने ही अपनो को घात,

पर आजादी के परवानों ने हार नहीं मानी थी,

विदेशियों से देश को आजाद कराने की जिद्द ठानी थी,

एक के एक बाद किये विदेशी शासकों पर घात,

छोड़ दी अपनी जान की परवाह, बस आजाद होने की थी आखिरी आस।

1857 की क्रान्ति आजादी के संघर्ष की पहली कहानी थी,

जो मेरठ, कानपुर, बरेली, झांसी, दिल्ली और अवध में लगी चिंगारी थी,

जिसकी नायिका झांसी की रानी आजादी की दिवानी थी,

देश भक्ति के रंग में रंगी वो एक मस्तानी थी,

जिसने देश हित के लिये स्वंय को बलिदान करने की ठानी थी,

उसके साहस और संगठन के नेतृत्व ने अंग्रेजों की नींद उड़ायी थी,

हरा दिया उसे षडयंत्र रचकर, कूटनीति का भंयकर जाल बुनकर,

मर गयी वो पर मरकर भी अमर हो गयी,

अपने बलिदान के बाद भी अंग्रेजों में खौफ छोड़ गयी|

उसकी शहादत ने हजारों देशवासियों को नींद से उठाया था,

अंग्रेजी शासन के खिलाफ एक नयी सेना के निर्माण को बढ़ाया था,

फिर तो शुरु हो गया अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष का सिलसिला,

एक के बाद एक बनता गया वीरों का काफिला,

वो वीर मौत के खौफ से न भय खाते थे,

अंग्रेजों को सीधे मैदान में धूल चटाते थे,

ईट का जवाब पत्थर से देना उनको आता था,

अंग्रेजों के बुने हुये जाल में उन्हीं को फसाना बखूबी आता था|

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26 जनवरी पर कविता 2024 | 26 January Par Kavita

यदि आप गणतंत्र दिवस के अवसर पर 26 जनवरी पर कविता पढ़ना या बोलना चाहते हैं तो उसका बेहतरीन कलेक्शन नीचे दे रहे हैं

26 जनवरी को आता हमारा गणतंत्र दिवस,

जिसे मिलकर मनाते हैं हम सब हर वर्ष।

इस विशेष दिन भारत बना था प्रजातंत्र,

इसके पहले तक लोग ना थे पूर्ण रूप से स्वतंत्र।

इसके लिए किये लोगो ने अनगिनत संघर्ष,

गणतंत्र प्राप्ति से लोगों को मिला नया उत्कर्ष।

गणतंत्र द्वारा मिला लोगों को मतदान का अधिकार,

जिससे बनी देशभर में जनता की सरकार।

इसलिए दोस्तों तुम गणतंत्र का महत्व समझो,

चंद पैसो की खातिर अपना मतदान ना बेचो।

क्योंकि यदि ना रहेगा हमारा यह गणतंत्र,

तो हमारा भारत देश फिर से हो जायेगा परतंत्र।

तो आओ हम सब मिलकर ले प्रतिज्ञा,

मानेंगे संविधान की हर बात ना करेंगे इसकी अवज्ञा

देखो फिर से गणतंत्र दिवस आ गया,

जो आते ही हमारे दिलों-दिमाग पर छा गया।

यह है हमारे देश का राष्ट्रीय त्योहार,

इसलिए तो सब करते हैं इससे प्यार।

इस अवसर का हमें रहता विशेष इंतजार,

क्योंकि इस दिन मिला हमें गणतंत्र का उपहार।

आओ लोगो तक गणतंत्र दिवस का संदेश पहुचाएं,

लोगो को गणतंत्र का महत्व समझाये।

गणतंत्र द्वारा भारत में हुआ नया सवेरा,

इसके पहले तक था देश में तानाशाही का अंधेरा।

क्योंकि बिना गणतंत्र देश में आ जाती है तानाशाही,

नही मिलता कोई अधिकार वादे होते हैं हवा-हवाई।

तो आओ अब इसका और ना करें इंतजार,

गणतंत्र दिवस पर छोटी सी कविता

गणतंत्र दिवस पर छोटी सी कविता का विवरण हम आपको नीचे दे रहे हैं-

26 जनवरी को आता हमारा गणतंत्र दिवस,
जिसे मिलकर मनाते हैं हम सब हर वर्ष।

इस विशेष दिन भारत बना था प्रजातंत्र,
इसके पहले तक लोग ना थे पूर्ण रूप से स्वतंत्र।

इसके लिए किये लोगो ने अनगिनत संघर्ष,
गणतंत्र प्राप्ति से लोगों को मिला नया उत्कर्ष।

गणतंत्र द्वारा मिला लोगों को मतदान का अधिकार,
जिससे बनी देशभर में जनता की सरकार।

इसलिए दोस्तों तुम गणतंत्र का महत्व समझो,
चंद पैसो की खातिर अपना मतदान ना बेचो।

क्योंकि यदि ना रहेगा हमारा यह गणतंत्र,
तो हमारा भारत देश फिर से हो जायेगा परतंत्र।

तो आओ हम सब मिलकर ले प्रतिज्ञा,मानेंगे
संविधान की हर बात ना करेंगे इसकी अवज्ञा।

Republic Day Poem in Hindi 

रिपब्लिक डे पर Republic Day Poem in Hindi बेहतरीन कलेक्शन नीचे प्रस्तुत कर रहे हैं:-

भारत देश हमारा है यह

हमको जान से प्यारा है

दुनिया में सबसे न्यारा यह

सबकी आंखों का तारा है

मोती हैं इसके कण- कण में

बूँद- बूँद में सागर है

प्रहरी बना हिमालय बैठा

धरा सोने की गागर है

भूमि ये अमर जवानों की है

वीरों के बलिदानों की

रत्नों के भंडार भरे हैं

गाथा स्वर्णिम खानों की

सत्य, अहिंसा, शांति बाँटता

इसकी शान तिरंग़ा है

गोद खेलती नटखट नदियाँ

पावन यमुना- गंगा है

चंदन की माटी से महके

मातृभूमि को वंदन है

कोटि-कोटि भारतवालों का

सुंदर सा यह नंदन है

दुनिया में सबसे न्यारा यह

सबकी आँखों का तारा है

हमको जान से प्यारा यह

भारत देश हमारा है.-

जय हिन्द ,जय भारत.

गणतंत्र दिवस 2024 पर कविता

गणतंत्र दिवस के अवसर पर गणतंत्र दिवस 2024 पर कविता का विवरण नीचे दे रहे हैं-

लो आज छब्बीस जनवरी का दिन आया,

सबके दिलों में तिरंगा लहराया।

किसी की प्रोफाइल,तो किसी के

फेसबुक में फिर से है तिरंगा छाया।

लो आज छब्बीस जनवरी का दिन आया।।

आज एक साल बाद फिर से सबको देश

का है ख्याल आया। छोटे छोटे मुद्दों पर

सयासी रोटी सेकने वालों को,आज सियाचिन

का शेर नज़र आया, लो आज छब्बीस

जनवरी का दिन आया।। साल भर बेआबरू

करते रहे जिस माँ को, उस भारत माँ का

जय कार पूकारने वाला नज़र आया,

कभी गौ हत्या, कभी जल्लीकट्टू, तो कभी

पद्मावती के नाम पर अपने ही लोगों को मारने

वाला हर वो शख्स, आज तिरंगे को सलाम करता

नज़र आया। लो आज छब्बीस जनवरी का दिन आया।।जय हिन्द, जय भारत.

Hindi Poem On Republic Day | Republic Day Poem in Hindi 2024

रिपब्लिक डे पर Republic Day Poem in Hindi 2024 का विवरण दे रहे हैं- 

यह मेरा आजाद तिरंगा,
लहर लहर लहराए रे
भारत माँ मुस्काए तिरंगा,
लहर लहर लहराए रे

इस झंडे का बापू जी ने,
कैसा मान बढ़ाया है
लाल किले पर नेहरू जी,
ने यह झंडा फहराया

माह जनवरी छब्बीस को
हम,सब गणतंत्र मनाते
और तिरंगे को फहरा कर
गीत ख़ुशी के गाते.

आज नई सज-धज से
गणतंत्र दिवस फिर आया है।

नव परिधान बसंती रंग का
माता ने पहनाया है।

भीड़ बढ़ी स्वागत करने को
बादल झड़ी लगाते हैं।

रंग-बिरंगे फूलों में
ऋतुराज खड़े मुस्काते हैं।

धरती मां ने धानी साड़ी
पहन श्रृंगार सजाया है।
गणतंत्र दिवस फिर आया है।

भारत की इस अखंडता को
तिलभर आंच न आने पाए।

हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई
मिलजुल इसकी शान बढ़ाएं।

युवा वर्ग सक्षम हाथों से
आगे इसको सदा बढ़ाएं।

इसकी रक्षा में वीरों ने
अपना रक्त बहाया है।

गणतंत्र दिवस फिर आया है।

26 January Poem In Hindi

26 जनवरी के अवसर पर 26 January Poem In Hindi आपके साथ शेयर कर रहे हैं:-

एक और जंजीर तड़कती है, भारत मां की जय बोलो।

इन जंजीरों की चर्चा में कितनों ने निज हाथ बंधाए,

कितनों ने इनको छूने के कारण कारागार बसाए,

इन्हें पकड़ने में कितनों ने लाठी खाई, कोड़े ओड़े,

और इन्हें झटके देने में कितनों ने निज प्राण गंवाए!

किंतु शहीदों की आहों से शापित लोहा, कच्चा धागा।

एक और जंजीर तड़कती है, भारत मां की जय बोलो।

जय बोलो उस धीर व्रती की जिसने सोता देश जगाया,

जिसने मिट्टी के पुतलों को वीरों का बाना पहनाया,

जिसने आजादी लेने की एक निराली राह निकाली,

और स्वयं उसपर चलने में जिसने अपना शीश चढ़ाया,

घृणा मिटाने को दुनियाँ से लिखा लहू से जिसने अपने,

‘जो कि तुम्हारे हित विष घोले, तुम उसके हित अमृत घोलो।’

एक और जंजीर तड़कती है, भारत मां की जय बोलो।

कठिन नहीं होता है बाहर की बाधा को दूर भगाना,

कठिन नहीं होता है बाहर के बंधन को काट हटाना,

गैरों से कहना क्या मुश्किल अपने घर की राह सिधारें,

किंतु नहीं पहचाना जाता अपनों में बैठा बेगाना,

बाहर जब बेड़ी पड़ती है भीतर भी गांठें लग जातीं,

बाहर के सब बंधन टूटे, भीतर के अब बंधन खोलो।

एक और जंजीर तड़कती है, भारत मां की जय बोलो।

कटीं बेड़ियां औ’ हथकड़ियां, हर्ष मनाओ, मंगल गाओ,

किंतु यहां पर लक्ष्य नहीं है, आगे पथ पर पांव बढ़ाओ,

आजादी वह मूर्ति नहीं है जो बैठी रहती मंदिर में,

उसकी पूजा करनी है तो नक्षत्रों से होड़ लगाओ।

हल्का फूल नहीं आजादी, वह है भारी जिम्मेदारी,

उसे उठाने को कंधों के, भुजदंडों के, बल को तोलो।

एक और जंजीर तड़कती है, भारत मां की जय बोलो।

– हरिवंश राय बच्चन

Short Poem on Republic Day in Hindi

हम आपके साथ नीचे Short Poem on Republic Day in Hindi शेयर कर रहे हैं-

मेरा भारत, मेरी मातृभूमि,
तू है अद्भुत और सुंदर।
तेरी धरती, तेरा आकाश,
तेरी नदियाँ, तेरे पर्वत,
सब ही अविस्मरणीय हैं।

तेरे लोग, तेरे संस्कृति,
तेरी विरासत, तेरा इतिहास,
सब ही गौरवशाली हैं।

तू है सत्य, तू है धर्म,
तू है शांति, तू है अहिंसा।
तू है ज्ञान, तू है दर्शन,
तू है प्रकाश, तू है जीवन।

मेरा भारत, मेरी मातृभूमि,
तू है मेरे हृदय में बसता।
मैं तेरा सदैव ऋणी रहूंगा

26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर कविता | Poem on 26 January in Hindi

नीचे हम आपको रिपब्लिक डे संबंधित बेहतरीन कविता का विवरण दे रहे हैं-

होठों पे सच्चाई रहती है, जहां दिल में सफाई रहती है

हम उस देश के वासी हैं, हम उस देश के वासी हैं

जिस देश में गंगा बहती है

मेहमां जो हमारा होता है, वो जान से प्यारा होता है

ज्यादा की नहीं लालच हमको, थोड़े मे गुजारा होता है

बच्चों के लिये जो धरती मां, सदियों से सभी कुछ सहती है

हम उस देश के वासी हैं, हम उस देश के वासी हैं

जिस देश में गंगा बहती है

कुछ लोग जो ज्यादा जानते हैं, इंसान को कम पहचानते हैं

ये पूरब है पूरबवाले, हर जान की कीमत जानते हैं

मिल जुल के रहो और प्यार करो, एक चीज यही जो रहती है

हम उस देश के वासी हैं, हम उस देश के वासी हैं

जिस देश में गंगा बहती है

जो जिससे मिला सिखा हमने, गैरों को भी अपनाया हमने

मतलब के लिये अन्धे होकर, रोटी को नही पूजा हमने

अब हम तो क्या सारी दुनिया, सारी दुनिया से कहती है

हम उस देश के वासी हैं, हम उस देश के वासी हैं

जिस देश में गंगा बहती है..

– शैलेन्द्र

26 जनवरी की कविता | Kavita On Republic Day in Hindi

 26 जनवरी के अवसर पर हम छात्रों के लिए Kavita on Republic Day in Hindi का कलेक्शन नीचे प्रस्तुत कर रहे हैं:-

नहीं, ये मेरे देश की आंखें नहीं हैं

पुते गालों के ऊपर

नकली भवों के नीचे

छाया प्यार के छलावे बिछाती

मुकुर से उठाई हुई

मुस्कान मुस्कुराती

ये आंखें

नहीं, ये मेरे देश की नहीं हैं…

तनाव से झुर्रियां पड़ी कोरों की दरार से

शरारे छोड़ती घृणा से सिकुड़ी पुतलियां

नहीं, ये मेरे देश की आंखें नहीं हैं…

वन डालियों के बीच से

चौंकी अनपहचानी

कभी झांकती हैं

वे आंखें,

मेरे देश की आंखें,

खेतों के पार

मेड़ की लीक धारे

क्षिति-रेखा को खोजती

सूनी कभी ताकती हैं

वे आंखें…

उसने झुकी कमर सीधी की

माथे से पसीना पोछा

डलिया हाथ से छोड़ी

और उड़ी धूल के बादल के

बीच में से झलमलाते

जाड़ों की अमावस में से

मैले चांद-चेहरे सुकचाते

में टंकी थकी पलकें उठाईं

और कितने काल-सागरों के पार तैर आईं

मेरे देश की आंखें…

– अज्ञेय

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