Gangaur Festival 2024: जानना चाहते है गणगौर  त्योहार अप्रैल में कब मनाया जाएगा जाने इस दिन का  इतिहास और महत्व

Gangaur Festival 2024: गणगौर राजस्थान के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह गुजरात, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में भी मनाया जाता है। इस त्यौहार को राजस्थान में काफी उमंग और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन सभी मारवाड़ी महिलाएं माता गौरी की पूजा करती हैं।ताकि उन्हें सौभाग्यवती का आशीर्वाद मिल सकें। इसके अलावा भगवान शंकर की भी पूजा आराधना की जाती हैं। ऐसी मान्यता है कि यदि कोई भी विवाहित स्त्री गणगौर का त्योहार मनाएगी तो उसके पति की उम्र लंबी होगी। गणगौर का त्योहार कुंवारी कन्याएं मानती है तो उन्हें भगवान शंकर के जैसा योग्य पति मिलेगा। यह शुभ त्यौहार हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के दूसरे दिन, शुक्ल पक्ष तृतीया के दिन मनाया जाता है और 18 दिनों तक  मनाया जाता हैं। राजस्थान में इस त्यौहार के अवसर पर विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। जहां पर लाखों की संख्या में देश और विदेश से लोग घूमने के लिए आते हैं।

ऐसे में अगर आप भी जानना चाहते हैं कि 2024 में गणगौर त्यौहार कब मनाया जाएगा इसका महत्व क्या है के बारे में जानना चाहते हैं? तो आज के लेख में Gangaur Festival 2024 से जुड़ी सभी जानकारी के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी आपको प्रदान करेंगे आप हमारे साथ आर्टिकल पर बने रहिएगा आईए जानते हैं:- 

Gangaur Festival – Overview

आर्टिकल का प्रकारमहत्वपूर्ण त्यौहार
आर्टिकल का नामगणगौर  त्योहार
आर्टिकल की भाषाहिंदी
कब मनाया जाएगा11 अप्रैल को
कौन से धर्म के लोग मानते हैंहिंदू धर्म मानने वाले लोग
किस राज्य का प्रमुख त्यौहार हैराजस्थान का
क्यों मनाया जाता हैपति की लंबी उम्र के लिए

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गणगौर पर्व हिंदी में (Gangaur Festival in Hindi) 

भारत में विभिन्न संस्कृति और परंपरा का अनुसरण करने वाले लोग निवास करते हैं और प्रत्येक राज्य की अपनी एक परंपरा और संस्कृति हैं। भारत के प्रत्येक राज्य में कोई ना कोई त्यौहार वहां का प्रमुख त्यौहार हैं।  जिसे वहां पर  रहने वाले लोग काफी उमंग और उत्साह के साथ मनाते हैं। ऐसे में गणगौर त्यौहार के बारे में आप लोगों ने जरूर सुना होगा जिसे विवाहित स्त्रियां अपने पति की लंबी उम्र के लिए मानती हैं। दरअसल गणगौर त्यौहार राजस्थान का प्रमुख त्यौहार हैं।  राजस्थान में मारवाड़ी समुदाय के लोगों की संख्या अधिक है और उनके द्वारा इस त्यौहार को काफी उमंग और हर्ष उल्लास के साथ मनाया जाता हैं।  ऐसी मान्यता है कि जो भी महिला गणगौर का त्योहार मनाएगी उसके पति की उम्र लंबी होगी और घर में सुख और समृद्धि हमेशा बनी रहेगी। गणगौर का त्योहार केवल विवाहित स्त्रियों के द्वारा ही नहीं मनाया जाता है, बल्कि कुंवारी कन्याएं भी इस त्यौहार को मना सकती हैं और अगर वह इस त्यौहार को श्रद्धा के साथ  पूरा करती है तो उन्हें भगवान शंकर के जैसा पति मिलेगा क्योंकि  आज के दिन माता पार्वती को सौभाग्यवती का वरदान प्राप्त हुआ था।  तभी से गणगौर का त्यौहार मनाया जाता हैं।

गणगौर का मतलब (Gangaur Meaning)

गणगौर शब्द दो शब्दों अर्थात गण और गौर से मिलकर बना है। गण भगवान शिव का पर्याय है और गौर गौरी या देवी पार्वती का पर्याय है जो वैवाहिक आनंद  का प्रतीक है।  

गणगौर क्या है (Gangaur Kya Hai) 

गणगौर नाम क्रमशः भगवान शिव और देवी पार्वती के पर्यायवाची शब्द “गण” और “गौरी” से मिलकर बना है; दो अत्यंत पूजनीय हिंदू देवता। नाम से पता चलता है कि यह त्योहार देवी पार्वती और भगवान शिव के प्रति श्रद्धा में मनाया जाता हैं।

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गणगौर क्या होता है (Gangaur Kya Hota Hai)

गणगौर  राजस्थान का एक प्रमुख त्यौहार है इस त्यौहार को विवाहित स्त्रियों के द्वारा मनाया जाता है ऐसी मान्यता है कि जो स्त्री इस्तेमाल को मनाएगी उसके पति की उम्र लंबी होगी है उसे माता पार्वती और भगवान शंकर की विशेष कृपा प्राप्त होगी राजस्थान में इस त्यौहार के शुभ अवसर पर विशाल मेले का आयोजन किया जाता है जहां पर लाखों की संख्या में विदेशी पर्यटक घूमने के लिए आते हैं। राजस्थान में गणगौर त्यौहार 18दिनों तक मनाया जाता है और इसका समापन भव्य आयोजन के साथ हुआ। उस दिन महिलाएं अपने सिर पर शिव और गौरी की सुशोभित मूर्तियों को लेकर बड़ी धूमधाम और धूमधाम से एक भव्य जुलूस निकालती हैं। इस पूरे उत्सव के दौरान, वे दिन में केवल एक बार भोजन करती हैं और अपने पति को सफल, स्वस्थ और लंबी उम्र का आशीर्वाद देने के लिए शुद्ध मन से देवताओं की की पूजा की जाती है ताकि देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त हो सकें 

गणगौर कब मनाया जाता है (When Gangaur is Celebrated)

इस वर्ष गणगौर 11 अप्रैल 2024 को मनाया जाएगा और दैनिक पूजा सोमवार 25 मार्च 2024 शुरू हो चुकी है

सूर्योदय पर सर्वोत्तम मुहूर्त होगा: प्रातः 6:29 – प्रातः 8:24

अभिजात मुहूर्त शुरू होने का: 12:04 pm – 12:52 pm

तिथिसमयतारीख
तृतीया तिथि आरंभ समय05:30 अपराह्न10 अप्रैल 2024
तृतीया तिथि समाप्ति समय03:00 अपराह्न11 अप्रैल 2024

गणगौर कब है (Gangaur Kab Hai)

गणगौर त्यौहार 2024 में 11 अप्रैल 2024 को मनाया जाएगा इस दिन सभी विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए माता पार्वती और भगवान शंकर की पूजा आराधना करेंगे |

गणगौर का इतिहास (Gangaur History) 

गणगौर त्यौहार से जुड़ी पौराणिक कहानियाँ और लोककथाएँ बताती हैं कि यह त्यौहार प्राचीन काल से मनाया जा रहा है। भगवान शिव और देवी पार्वती की कहानियों को पूरन जैसे ग्रंथ के माध्यम से बताया गया है इस तथ्य की पुष्टि करता है कि गणगौर एक प्राचीन त्योहार है।गणगौर त्योहार मुख्य रूप से राजस्थान राज्य से संबंधित है, लेकिन पिछली सदी के बाद से जनसंख्या प्रवास के कारण यह त्योहार मध्य प्रदेश, गुजरात और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में फैल गया जिसके बाद से ही इस त्यौहार को मनाने की परंपरा शुरू की गई विशेष तौर पर ययह त्योहार राजस्थान में मनाया जाता है क्योंकि राजस्थान का प्रमुख त्यौहार हैं।

गणगौर क्यों मनाया जाता है (Gangaur Kyu Manaya Jata Hai)

गणगौर के शुभ अवसर पर विवाहित या अविवाहित महिलाएं प्रेम और विवाह के पवित्र बंधन को निभाने के लिए व्रत रखती हैं। विवाहित महिलाएं अपने पतियों के विकास और कल्याण के लिए प्रार्थना करती हैं जबकि अविवाहित महिलाएं देवी से उनके लिए एक अच्छा जीवनसाथी  पानी के लिए करती हैं आज के दिन भगवान पार्वती को सौभाग्यवती का आशीर्वाद प्राप्त हुआ था तभी से इस प्रकार की मान्यता है कि अगर कोई भी विधाता महिला गणगौर त्यौहार का पालन विधि विधान और श्रद्धा के साथ करती है तो उसके पति की उम्र लंबी होगी और साथ में उसे माता पार्वती और भगवान शंकर दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होगा क्योंकि भगवान शंकर और माता पार्वती एक आदर्श वैवाहिक जोड़े का प्रतीक हैं। 

गणगौर का महत्व (Gangaur Festival Significance)

गणगौर त्यौहार का हिंदू महिला भक्तों के बीच बहुत महत्व है।  जैसा कि आप लोगों को मालूम है कि गणगौर, गण का अर्थ है भगवान शिव और गौर का अर्थ है गौरी या पार्वती। इस त्यौहार में माता पार्वती की पूजा की जाती है ताकि उनसे सौभाग्यवती का आशीर्वाद प्राप्त हो सके इसके अलावा किसी दिन भगवान शंकर की भी पूजा की जाती है ताकि आपको भगवान शंकर का भी आशीर्वाद प्राप्त हो सकें | अविवाहित महिलाएं एक अच्छा जीवन साथी पाने के लिए व्रत रखती हैं जबकि विवाहित महिलाएं सुखी वैवाहिक जीवन के लिए व्रत रखती हैं। गणगौर का त्योहार राजस्थान का प्रमुख त्यौहार हैं। राजस्थान के उदयपुर शहर में स्थित पिछोला झील केगणगौर घाट पर विशाल गणगौर उत्सव का आयोजन किया जाता है जहां पर पूरे शहर से जुलूस निकालकर इस घाट पर लाया जाता है, उसके उपरांत मूर्तियों को पानी में विसर्जित किया जाता हैं।

गणगौर कथा (Gangaur Festival Story)

एक बार भगवान शंकर और माता पार्वती के साथ नारद नारद मुनि पृथ्वी का भरवा करने के लिए निकलते हैं। उसे समय माता पार्वती शंकर और नारद मुनि एक जंगल में पहुंचते हैं।  जब जंगल के आसपास रहने वाले लोगों कुछ बात की सूचना मिलती है’ माता पार्वती भगवान शंकर के साथ जंगल में आई है तो वहां पर आने वाली छोटी और बड़ी जाति के सभी महिलाएं माता पार्वती और भगवान शंकर के लिए स्वादिष्ट व्यंजन बनाने की प्रक्रिया शुरू करती हैं परंतु बड़े वर्ग की महिलाएं सजना में लग जाती है जबकि छोटे वर्ग की महिलाएं तुरंत स्वादिष्ट भोजन लेकर माता पार्वती और भगवान शंकर के पास जाती हैं।  स्वादिष्ट व्यंजन उन्हें खाने के लिए अर्पित करती हैं। उनके इस भक्ति भावना से माता पार्वती काफी पसंद होती हैं और उन्हें आशीर्वाद देती हैं कि आपका सुहाग हमेशा बना रहेगा और आपके घर में सुख समृद्धि हमेशा रहेगा इसके ठीक बाद बड़े घर की महिलाएं भी माता पार्वती और भगवान शंकर के लिए स्वादिष्ट व्यंजन लाती हैं इसके बाद भगवान शंकर कहते हैं की देवी तुमने तो अपना आशीर्वाद उन महिलाओं को दे दिया है जो छोटे वर्ग से आती हैं अब आप इन महिलाओं को क्या देंगे? जिस पर देवी पार्वती ने उत्तर दिया कि वह इन महिलाओं को अपने जैसा वैवाहिक और वैवाहिक आनंद का आशीर्वाद देंगी। जब उच्च जाति की महिलाओं ने देवताओं का स्मरण करने की अपनी रस्में पूरी कीं, तो उन्हें देवी पार्वती का आशीर्वाद मिला। महिलाएं आज तक देवी पार्वती की पूजा और स्मरण करने की परंपरा का पालन करती हैं और अपने पतियों के लिए वैवाहिक सुख और लंबी उम्र की आशा करती हैं। तभी से गणगौर त्यौहार मनाने की परंपरा शुरू हुई जो आज तक कायम हैं।

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गणगौर पर्व राजस्थान (Gangaur Festival in Rajasthan) 

गणगौर महोत्सव राजस्थान के शीर्ष त्योहारों में से एक है। गणगौर शब्द भगवान शिव और देवी गौरी से लिया गया है। विवाहित और कुंवारी कन्याओं के लिए गणगौर त्यौहार का विशेष महत्व क्योंकि जब विवाहित स्त्री इस त्यौहार को मानती है तो उसके पति की उम्र लंबी होती है और कुंवारी कन्याओं को अच्छे पति की प्राप्ति होती हैं। यह त्यौहार होली के अगले दिन से शुरू होता है जो अगले 18 दिनों तक मनाया जाता है। त्योहार के दौरान महिलाएं मिट्टी की पार्वती जी की मूर्ति बनती हैं और प्रत्येक सुबह उनकी विधि विधान के साथ पूजा करती है इसके अलावा मिट्टी के बर्तनों में गेहूं भी बोते हैं और बीज अंकुरित होने तक  उसमें प्रत्येक दिन पानी दिया जाता है इस दिन महिलाएं विभिन्न प्रकार के रंगीन पोशाक बनती है और हथेलियां पर मेहंदी भी लगती है त्योहार के सातवें दिन अविवाहित महिलाएं सिर पर खड़े रखकर अंदर दीपक जलाकर घर से बाहर निकलती है और बड़े लोगों का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं आखिरी दिन से एक दिन पहले विवाहित महिलाएं माता-पिता और अपने बेटी को कुछ उपहार अर्पित करती हैं।अंतिम दिन, महिलाएँ अपने सिर पर बर्तन और मूर्तियाँ लेकर सड़कों पर चलती हैं। मटकी तोड़कर मूर्ति को पानी में विसर्जित करना देवी गौरी के प्रस्थान का प्रतीक है। राजस्थान में गणगौर त्यौहार के दिन गणगौर  मेले का आयोजन किया जाता हैं। जिसमें लाखों की संख्या में विदेशी पर्यटक घूमने के लिए आते हैं।

गणगौर की जानकारी हिंदी में(Gangaur information in hindi)

गणगौर का त्योहार माता गौरी को समर्पित है जिन्हें वैवाहिक प्रेम और खुशी का प्रतीक माना जाता हैं। गणगौर  त्योहार के दौरान महिलाएं ट्रेडिशनल कपड़े पहनती हैं और गहनों से सजती हैं। वे पानी से भरे छेद वाले मिट्टी के बर्तन ले जाते हैं और उन्हें फूलों से सजाते हैं।  इसके अलावा इसके बारे में महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए माता गौरी और भगवान शंकर की पूजा विधि विधान से करती है ताकि दोनों का आशीर्वाद उन्हें प्राप्त हो सके महिलाएं दिन भर उपवास भी करते हैं, और देवी की पूजा करने के बाद ही इसे तोड़ते हैं। पूरे उत्सव के दौरान, गौरी की खूबसूरती से सजाई गई मूर्तियों के साथ विशाल जुलूस निकल जाती है.ये जुलूस संगीत, नृत्य और मंत्रोच्चार के साथ सड़कों पर घूमते हैं। इसके अलावा राजस्थान में गणगौर त्यौहार के दिन गणगौर मेले का आयोजन भी किया जाता है जिसमें विभिन्न प्रकार के सांस्कृतिक प्रोग्राम का आयोजन किया जाता हैं। लोग जश्न मनाने, स्वादिष्ट भोजन साझा करने और उत्सव के माहौल का आनंद लेने के लिए एक साथ आते हैं।

गणगौर उत्सव (Gangaur Celebration)

गणगौर उत्सव का 18 दिनों तक चलता है। जुलूस निकाले जाते हैं और महिलाएं गौरी के रूप में सजकर जुलूस में भाग लेती हैं।  इलाहाबाद दूसरी महिलाएं गौरी माता की सजी-धजी मूर्तियां अपने सिर पर रखकर लोकगीत गाते हुए जुलूस में सम्मिलित होती हैं। त्यौहार के लिए गौरी की मूर्तियाँ मिट्टी से बनाई जाती हैं, और लकड़ी की ईसर गणगौर भी देखी जाती है। राजस्थान में गणगौर का त्यौहार बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। उदयपुर में, उत्सव में एक नाव जुलूस शामिल होता है जो आतिशबाजी के  प्रदर्शन के साथ समाप्त होता है। 

Conclusion:

उम्मीद करता हूं कि हमारे द्वारा लिखा गया आर्टिकल आपको पसंद आएगा आर्टिकल संबंधित अगर आपका कोई भी सुझाव या प्रश्न है तो आप हमारे कमेंट सेक्शन में जाकर पूछ सकते हैं जिसका उत्तर हम आपको जरूर देंगे तब तक के लिए धन्यवाद और मिलते हैं अगले आर्टिकल में 

FAQ’s: गणगौर 2024 | Gangaur Festival kab Hai

Q. गणगौर 2024 की तारीख क्या है?

Ans.2024 में गणगौर 26 मार्च मंगलवार से 11 अप्रैल 2024 गुरुवार तक मनाया जाएगा।

Q गणगौर उत्सव की अवधि क्या है?

Ans. गणगौर त्यौहार की अवधि आम तौर पर 18 दिनों तक होती है। यह देवी गौरी के सम्मान में भारत के राजस्थान राज्य में मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा मनाया जाता है। यह त्यौहार आम तौर पर चैत्र के हिंदू महीने के दौरान मार्च या अप्रैल में पड़ता है।

Q  क्या तीज और गणगौर त्यौहार एक है? 

Ans. हालाँकि तीज और गणगौर दोनों महिलाओं द्वारा मनाए जाने वाले हिंदू त्योहार हैं, लेकिन वे अलग-अलग हैं। तीज भगवान शिव और देवी पार्वती के मिलन को समर्पित है, जबकि गणगौर मुख्य रूप से वैवाहिक आनंद और पतियों की लंबी उम्र का सम्मान करता है।

Q. कौन से हिंदू महीने में गणगौर त्यौहार मनाया जाता है?  

Ans. गणगौर हिंदू महीने चैत्र में पड़ता है, जो आमतौर पर ग्रेगोरियन कैलेंडर में मार्च-अप्रैल से मेल खाता है।

Q. गणगौर त्यौहार की पूजा विधि क्या है?

Ans. गणगौर पूजा विधि में शिव और पार्वती की मूर्तियों की सफाई करना, उन्हें नए कपड़े और आभूषणों से सजाना, अनुष्ठान करना, प्रार्थना करना और उपवास  करना होता हैं।

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